Assalamu Alaikum

Tayyab Money"Tayyab" (طيب) means pure and clean in Arabic. Tayyab Money is your guide to halal, ethical, and Sharia-compliant finance.

إِنَّ الَّذِينَ يَتْلُونَ كِتَابَ اللَّهِ وَأَقَامُوا الصَّلَاةَ وَأَنفَقُوا مِمَّا رَزَقْنَاهُمْ سِرًّا وَعَلَانِيَةً يَرْجُونَ تِجَارَةً لَّن تَبُورَ

"Indeed, those who recite the Book of Allah and establish prayer and spend out of what We have provided them, secretly and publicly, can expect a transaction that will never perish."

— Quran 35:29
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क्या कॉलेज एक ऐश-ओ-आराम है या बुनियादी ज़रूरत?
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यहाँ इस्लामी शरिया के 'ज़रूरह' (जीवन-मरण का संकट) और 'हाजह' (गंभीर ज़रूरत) के सिद्धांतों को समझाया गया है। कौम को अज्ञानता और गरीबी से बचाना 'फर्ज़-ए-किफ़ाया' (सामूहिक कर्तव्य) है। इसलिए, उलेमा के अनुसार यदि कोई दूसरा आर्थिक रास्ता न बचे, तो शीर्ष सरकारी संस्थानों की फीस के लिए लोन लेने को कुछ बेहद सख्त शर्तों (जैसे सिर्फ अनिवार्य फीस लेना और नौकरी लगते ही तुरंत चुकाना) के साथ एक आपातकालीन अपवाद माना जा सकता है।

Mohasin Mujawar May 23, 2026
#islam #education #community
उच्च शिक्षा और सूद (ब्याज) का संकट: भारतीय मुस्लिमों के लिए एक व्यावहारिक रास्ता
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चाहे आप 10वीं के छात्र हों जो अपने भविष्य का ख़्वाब देख रहे हैं, या एक फिक्रमंद वालिदैन (माता-पिता) हों, या कोई बुजुर्ग दादा-दादी—यह सीरीज़ आपको बताएगी कि अपने ईमान को सूद के एक रुपये पर भी कुर्बान किए बिना, आप दुनिया के बेहतरीन कॉलेजों की फीस का इंतज़ाम कैसे कर सकते हैं।

Mohasin Mujawar May 19, 2026
#islam #education #community
क्या सब्र का मतलब 'कुछ न करना' है? — 9 सबक जो आपकी सोच बदल देंगे
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"सब्र" शायद इस्लाम का सबसे गलत समझा गया लफ़्ज़ है—खासकर बिज़नेस की दुनिया में। बहुत-से लोग इसे "हाथ पर हाथ धरे बैठना" समझते हैं, जबकि हक़ीक़त में यह आपकी सबसे बड़ी "Business Strategy" है। यह 9-पार्ट सीरीज़ आपको बताएगी कि कैसे सब्र: (1) आपकी साख (Trust) बनाती है, (2) माली फैसलों में गेम-चेंजर है, (3) स्टार्टअप्स और लीडरशिप में सबसे बड़ा एसेट है, (4) इतिहास के कामयाब ताज़िरों का राज़ था, और (5) असली दौलत—दिल का सुकून—दिलाती है।

Mohasin Mujawar Apr 05, 2026
#sabr #business #islam #financial-stability
दौलत, बरकत और दिल का चैन — Life Lessons सीरीज़
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आज हम "Hustle Culture" (बस कमाओ, कमाओ, कमाओ!) के दौर में जी रहे हैं, जहाँ पैसा कमाना ही ज़िंदगी का मकसद बन गया है। लेकिन पैसा कमाने के बाद क्या? EMI का जाल, "लोग क्या कहेंगे" का डर, और रात की नींद उड़ाने वाली टेंशन—यही हमारी "Success" की हकीकत है? यह सीरीज़ आपको वो "Hidden Manual" देगी जो आपके पैसों को बरकत में, आपकी कमाई को सुकून में, और आपकी ज़िंदगी को मकसद में बदल देगी। क़ुरआन और सुन्नत की रोशनी में—Modern Finance की भाषा में।

Mohasin Mujawar Apr 05, 2026
#islam #financial-stability #halal-money
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